हरियाणवी संगीत और लोक कला की दुनिया में रागनियों का एक विशेष स्थान है। इन्हीं में से एक कालजयी रचना है— । वैसे तो इस रागनी को दिग्गज कलाकार राजेंद्र खरकिया (Rajender Kharkiya) जैसे गायकों ने अमर बनाया है, लेकिन हाल के समय में अंजू की आवाज में भी यह प्रस्तुति सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर खूब सुर्खियां बटोर रही है। रागनी का सार और इतिहास
अंजू की आवाज में वह दर्द और गहराई महसूस होती है जो मेहर सिंह की कविताओं की आत्मा है। जिसमें एक गहरा विरह
यह रागनी असल में महान कवि और फौजी (Foji Mehar Singh) द्वारा लिखी गई है। इसके शब्द सीधे दिल को छूते हैं, जिसमें एक गहरा विरह, यादें और जीवन के उतार-चढ़ाव छिपे हैं। जब कोई गायक इसे गाता है, तो वह केवल शब्द नहीं कहता, बल्कि एक कहानी बयां करता है। जिसमें एक गहरा विरह
"के सपना तेरा जिक्र करूँ" केवल एक गाना नहीं है, यह यादों का एक झरोखा है। इसकी पंक्तियाँ श्रोताओं को पुराने समय और अपनेपन की याद दिलाती हैं। आज के शोर-शराबे वाले संगीत के बीच, अंजू की आवाज में यह रागनी सुकून देने वाली है। निष्कर्ष जिसमें एक गहरा विरह